शिवलिंग पर बने त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं का रहस्य ।।
शिवलिंग पर बने त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं का रहस्य ।। प्राय: साधु सन्तों और विभिन्न पंथों के अनुयायियों के माथे पर अलग अलग तरह के तिलक दिखाई देते हैं। तिलक विभिन्न सम्प्रदाय, अखाड़ों और पंथों की पहचान होते हैं। हिन्दू धर्म में संतों के जितने मत, पंथ और सम्प्रदाय है उन सबके तिलक भी अलग अलग हैं। अपने अपने इष्ट के अनुसार लोग तरह तरह के तिलक लगाते हैं। शैव परम्परा का तिलक कहलाता है - "त्रिपुण्ड" भगवान शिव के मस्तक पर और शिवलिंग पर सफेद चंदन या भस्म से लगाई गई तीन आड़ी रेखाएं त्रिपुण्ड कहलाती हैं। ये भगवान शिव के श्रृंगार का हिस्सा हैं। शैव परम्परा में शैव संन्यासी ललाट पर चंदन या भस्म से तीन आड़ी रेखा त्रिपुण्ड् बनाते हैं। बीच की तीन अंगुलियों से भस्म लेकर भक्तिपूर्वक ललाट में त्रिपुण्ड लगाना चाहिए। ललाट से लेकर नेत्रपर्यन्त और मस्तक से लेकर भौंहों (भ्रकुटी) तक त्रिपुण्ड् लगाया जाता है। भस्म मध्याह्न से पहले जल मिला कर, मध्याह्न में चंदन मिलाकर और सायंकाल सूखी भस्म ही त्रिपुण्ड् रूप में लगानी चाहिए। त्रिपुण्ड की तीन आड़ी रेखाओं का रहस्य: त्रिपुण्ड् की तीनों रेखाओं में से...