शिव पुराण कथा चरित्र 02 | चञ्चुला और बिंदुग की संपूर्ण कथा
शिव पुराण कथा चरित्र 02 | चञ्चुला और बिंदुग की संपूर्ण कथा शौनकजीने कहा महाभाग सूतजी | आप सर्वज्ञ हैं। महामते ! आपके कृपाप्रसादसे में बारंबार कृतार्थ हुआ। इस इतिहासको सुनकर मेरा मन अत्यन्त आनन्दित हो रहा है। अतः अब भगवान् शिवमें प्रेम बढ़ानेवाली भगवान् शिव से सम्बन्धिनी दूसरी कथाको भी कहिये । श्रीसूतजी बोले शौनक जी ! सुनो, मैं तुम्हारे सामने गोपनीय कथावस्तुका वर्णन करू रहा हूं ; क्योंकि तुम शिव भक्तोंमें अप्रगण्य तथा वेदवेत्ताओंमें श्रेष्ठ हो । समुद्रके निकटवर्ती प्रदेश में एक वाष्कल नामक ग्राम है, जहाँ वैदिक धर्मसे विमुख महापापी द्विज अर्थात ब्राह्मण निवास करते हैं । वे सब-के सब बड़े दुष्ट हैं, उनका मन हमेशा दूषित विषय भोगोंमें ही लगा रहता है। वे न देवताओंपर विश्वास करते हैं न भाग्यपर; वे सभी कुटिल वृत्तिवाले हैं । वे किसानी करते हैं और भाँति भाँतिके घातक अस्त्र-शस्त्र रखते हैं। वे व्यभिचारी और खल भी हैं। वे इस बातको वे बिलकुल नहीं जानते कि ज्ञान, वैराग्य तथा सद् धर्मका सेवन ही मनुष्यके लिये परम पुरुषार्थ है। इस प्रकार वे सभी ...