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05. कोटिरुद्रसंहिता | 15. रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिङ्गके आविर्भाव तथा माहात्म्यका वर्णन

05. कोटिरुद्रसंहिता | 15. रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिङ्गके आविर्भाव तथा माहात्म्यका वर्णन सूतजी कहते हैं-ऋषियो ! अब मैं यह बता रहा हूँ कि रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिङ्ग पहले किस प्रकार प्रकट हुआ। इस प्रसङ्गको तुम आदरपूर्वक सुनो। भगवान् विष्णुके रामावतारमें जब रावण सीताजीको हरकर लङ्कामें ले गया, तब सुग्रीवके साथ अठारह पद्म वानरसेना लेकर श्रीराम समुद्रतटपर आये। वहाँ वे विचार करने लगे कि कैसे हम समुद्रको पार करेंगे और किस प्रकार रावणको जीतेंगे। इतनेमें ही श्रीरामको प्यास लगी। उन्होंने जल माँगा और वानर मीठा जल ले आये। श्रीरामने प्रसन्न होकर वह जल ले लिया। तबतक उन्हें स्मरण हो आया कि 'मैंने अपने स्वामी भगवान् शंकरका दर्शन तो किया ही नहीं। फिर यह जल कैसे ग्रहण कर सकता हूँ?' ऐप्सा कहकर उन्होंने उस जलको नहीं पिया। जल रख देनेके पश्चात् रघुनन्दनने पार्थिव पूजन किया। आवाहन आदि सोलह उपचारोंको प्रस्तुत करके विधिपूर्वक बड़े प्रेमसे शंकरजीकी अर्चना की। प्रणाम तथा दिव्य स्तोत्रोंद्वारा यत्नपूर्वक शंकरजीको संतुष्ट करके श्रीरामने भक्तिभावसे उनसे प्रार्थना की। श्रीराम बोले- उत्तम व्रतका पालन करनेवाले म...