पशुपति अस्त्र
पशुपति अस्त्र पशुपति शब्द का अर्थ होता है शिव अर्थात वह जो सभी जीवों (जीवितो) का भगवान हैं। पशुपतास्र के सामने कोई भी जीवित या मृत वस्तु नहीं टिक सकती यहा तक कि यह भगवन ब्रम्हा के बनाये ब्रह्मास्त्र और ब्रम्हाशिर अस्त्र को भी निगल सकता है। पशुपति व्रत का नाम आते ही दिमाग में पशुपति अस्त्र का नाम घूमने लगता है। जो महान भयानक एवं अत्यन्त विध्वंसक है। पशुपातास्त्र सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश कर सकता है। इसका प्रहार अचूक होने के कारण इसके प्रहार से बचना अत्यन्त कठिन। इसके लिए एक सार्वभौमिक नियम बनाया गया है कि इस अस्त्र से किया गया विनाश दोबारा ठीक नही किया जा सकता है। इस अस्त्र को अपने से कम बली या कम योद्धा पर नहीं चलाया जाता चाहिये। यह भगवान पशुपतिनाथ का अस्त्र है, कहा जाता है कि उन्होने इस अस्त्र को ब्रह्माण्ड की सृष्टि से पहले ही आदि परा शक्ति का घोर तप करके उनसे प्राप्त किया था। यह भगवान शिव, माता काली और आदि परा शक्ति का अस्त्र है। यह एक ऐसा अस्त्र है जिसे मन, आँख, शब्द और धनुष से नियंत्रित किया जा सकता है। पुराग्रंथों में आवाहनित अर्थात प्रयोग किये गये पशुपतास्र का वर्णन इस...