01. शिवपुराण माहात्म्य || 06 - 07. शिवपुराणके श्रवणकी विधि तथा श्रोताओंके पालन करनेयोग्य नियमोंका वर्णन
01. शिवपुराण माहात्म्य || 06 - 07. शिवपुराणके श्रवणकी विधि तथा श्रोताओंके पालन करनेयोग्य नियमोंका वर्णन शौनकजी कहते है महाप्राज्ञ व्यासशिष्य सूतजी ! आपको नमस्कार है। | आप धन्य है, शिवभक्तोंमें श्रेष्ठ है। आपके महान् गुण वर्णन करने योग्य हैं। अब आप कल्याणमय शिवपुराणके श्रवणकी विधि बतलाइये, जिससे सभी श्रोताओंको सम्पूर्ण उत्तम फलकी प्राप्ति हो सके। सूतजीने कहा मुने शौनक ! अब में तुम्हें सम्पूर्ण फलकी प्राप्तिके लिये शिवपुराणके श्रवणकी विधि बता रहा हूँ। पहले किसी ज्योतिषको बुलाकर दानमानसे संतुष्ट करके अपने सहयोगी लोगोंके साथ बैठकर बिना किसी विध्नबाधा के कथाकी समाप्ति होनेके उद्देश्यसे शुद्ध मुहूर्तका अनुसंधान कराये और प्रयत्नपूर्वक देश देशमें— स्थान-स्थानपर यह संदेश भेजे कि 'हमारे यहाँ शिवपुराणकी कथा होनेवाली है। अपने कल्याणकी इच्छा रखनेवाले लोगोंको उसे सुननेके लिये अवश्य पधारना चाहिये ।' कुछ लोग भगवान् श्रीहरिकी कथासे बहुत दूर पड़ गये हैं। कितने ही स्त्री, शूद्र आदि भगवान् शंकरके कथा-कीर्तनसे वश्चित रहते हैं। उन सबको भी सूचना हो जाये, ऐसा प्रबन्ध करना चाहिये। देश-देश में जो भगवान...