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भगवान शिव की पाँच नाग पुत्रियों

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🐍✨ क्या आप जानते हैं भगवान शिव की पाँच नाग पुत्रियों का रहस्य? ✨🐍 हम सभी भगवान गणेश और कार्तिकेय को महादेव के पुत्रों के रूप में पूजते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि शिव जी की पाँच दिव्य नाग पुत्रियां भी थीं? आइए जानते हैं सावन और नाग पंचमी से जुड़ी यह अद्भुत और अनसुनी कथा! 👇 🌺 एक रहस्यमयी जन्म: प्राचीन लोककथा के अनुसार, एक बार महादेव और माता पार्वती एक दिव्य सरोवर में जलक्रीड़ा कर रहे थे। उसी समय भगवान शिव के दिव्य तेज से एक पत्ते पर पाँच नाग कन्याओं का जन्म हुआ। माता पार्वती इस घटना से पूरी तरह अनजान थीं, लेकिन महादेव अपनी इन पुत्रियों से भी उतना ही स्नेह करते थे जितना वे गणेश और कार्तिकेय से करते थे। वे प्रतिदिन सुबह चुपचाप सरोवर पर जाते और अपनी पुत्रियों के साथ समय बिताते। 🤔 माता पार्वती का संदेह और क्रोध: रोज़ सुबह महादेव को बिना बताए जाते देख माता पार्वती को आश्चर्य हुआ। एक दिन उन्होंने छुपकर शिव जी का पीछा किया। सरोवर पर महादेव को पाँच नाग कन्याओं के साथ स्नेहपूर्वक खेलते देख माता पार्वती को क्रोध आ गया। अनजान होने के कारण, उन्होंने उन कन्याओं को दंड देने का प्र...

रुद्राक्ष और बेलपत्र का प्रयोग

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श्री शिवायः नमस्तुभ्यम । रुद्राक्ष का उपयोग * रुद्राक्ष को जल से भरे तांबे के लोटे में डालकर रखे । सुबह तांबे के लोटे का जल, भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ाये तथा जलहरी से गिरते हुए जल को दूसरे बर्तन में लेकर घर आऐ तथा बीमार या रोगी व्यक्ति को पिलाएँ। जल चढाते हुए बाबा कुंदकेश्वर से बीमारी दूर करने की कामना करते हुए जल चढाए। और इस जल को औषधि बनाने को प्रार्थना करें। * जल चढ़ाते वक्त ध्यान दें कि इसमें दूध नहीं मिला होना चाहिए । यदि कोई दूसरा दूध चढा रहा है तो शिव लिंग को पुन: धोकर दूसरे बर्तन में यह जल लेना चाहिए। यदि वह व्यक्ति मान जाए तो वह आपकी प्रार्थना करने पर आपके जल चढ़ने के समय कुछ देर के लिए रुक भी सकता है। बेलपत्र * यदि संभव हो तो भोले बाबा पर एक कोमल सा बेलपत्र चढाएं तथा उसे बाबा कुंदेकेश्वर (Kund Keswar) से प्रार्थना कर कि बाबा इसे ओषधि बना दो। कह कर और मांग कर ले ले । फिर इसे अशोक सुन्दरी व नन्दी को छुआ कर बीमार या रोगी व्यक्ति को खाने को दे। यदि बीमार / रोगी व्यक्ति मंदिर नहीं जा सकता तो घर का कोई भी व्यक्ति यह काम कर सकता है। अर्थात जल व बेलपत्र ला स...

महाकाल' की नगरी 'उज्जैन

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महाकाल' की नगरी 'उज्जैन कहते हैं उज्जैन वहीं जाता है, जिसे महाकाल स्वयं बुलाते हैं। उनके आदेश के बिना उज्जैन जाना संभव नहीं। गत दिनों उज्जैन जाने और महाकालेश्वर के दर्शन का अति सौभाग्य प्राप्त हुआ। उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 15 मिनट की दूरी पर स्थित महाकाल के प्रांगण में पहुंचते ही प्रतीत होता है, जैसे किसी दिव्यलोक में पहुंच गए हों। मंदिर प्रांगण में प्रवेश करने के लिए कई द्वार हैं, इनमें सबसे भव्य और नवनिर्मित त्रिवेणी द्वार है, जहां महाकाल कॉरिडोर भी बनाया गया है। प्रवेश करते ही भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा के दर्शन होते हैं, जिस उपरान्त भगवान शिव के विभिन्न रूपों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर में प्रवेश करने लिए गेट नम्बर 1' अवंतिका द्वार' सबसे पुराना है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का मुख दक्षिण की ओर है, जिसको यमराज की दिशा भी कहा जाता है। मान्यता है कि महाकाल के दर्शन करने के उपरान्त जीवन एक बार पुनः शून्य से शुरू होता है। पिछले सब पाप महाकाल हर लेते हैं और भक्तों को नए सिरे से जीवन प्रारम्भकरने की प्रेरणा देते हैं। महाकाले...

शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि

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शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि है।  शिवलिंगी गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है,,। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। यह शरीर के धातुओं को पुष्ट करती है। यह सभी कुष्ठ रोग को ठीक करने वाली होती है। शिवलिंगी हल्की वीरेचक यानी मल निकालने वाली और शरीर को ताकत देने वाली होती है। शिवलिंगी के बीज लिवर,सांस की बीमारी, पाचन तंत्र आदि के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। शिवलिंगी बीज के औषधीय गुण,,,,, गर्भधारण विकार में शिवलिंगी का बीज उपयोगी होता है:  प्रजनन का सीधा संबंध अंडाणुओं और शुक्राणुओं की संख्या और स्वस्थ से है । शिवलिंगी के बीज ओवेरियन रिजर्व जैसी समस्याओं को दूर करते हैं और मासिक धर्म को नियमित करते हैं। इसके बीज चूर्ण का प्रयोग गर्भधारण हेतु किया जाता है।  कई महात्मा लोग स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चार दिन बाद एक माह तक सुबह शाम शिवलिंगी बीज एक एक ग्राम की मात्रा में खाली पेट दूध के साथ सेवन कराते हैं। जिनको पुत्र प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़े ...

शिव उपासना

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🌹// श्री शिव उपासना //🌹       ************************* // श्रीशिव-पञ्चनामानि // ********************* ॐ सद्योजाताय नमः । ॐ वामदेवाय नमः । ॐ अघोराय नमः । ॐ तत्पुरुषाय नमः । ॐ ईशानाय नमः II ५ II II इति शिवपञ्चनामानि II 🌹// श्रीशिवाष्टनामानि //🌹 *************************** शिवो महेश्वरश्चैव रुद्रो विष्णुः पितामहः । संसारवैद्यः सर्वज्ञः परमात्मेति चाष्टकम् ॥ शिवाय नमः । महेश्वराय । रुद्राय ।  विष्णवे ।पितामहाय । संसारवैद्याय ।  सर्वज्ञाय । परमात्मने नमः । II इति शिवाष्टनामानि समाप्ता II 🌹// श्रीशिव द्वादशनामस्तोत्रम् //🌹 ******************************** प्रथमस्तु महादेवो द्वितीयस्तु महेश्वरः तृतीयः शङ्करो ज्ञेयश्चतुर्थो वृषभध्वजः॥१॥ पञ्चमः कृत्तिवासाश्च षष्ठः कामाङ्गनाशनः। सप्तमो देवदेवेशः श्रीकण्ठश्चाष्टमः स्मृतः॥२॥ ईश्वरो नवमो ज्ञेयो दशमः पार्व्वतीपतिः। रुद्र एकादशश्चैव द्बादशः शिव उच्यते॥३॥ द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः। कृतघ्नश्चैव गोघ्नश्च ब्रह्महा गुरुतल्पगः॥४॥ स्त्रीबालघातकश्चैव सुरापो वृषलीपतिः। मुच्यते सर्व्वपापेभ्यो रुद्रलोक...

नटराज का पूरा तांडव नृत्य जीवन और ब्रह्मांड की गति के संदर्भ में हमें क्या सिखाता है ?

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नटराज का पूरा तांडव नृत्य जीवन और ब्रह्मांड की गति के संदर्भ में हमें क्या सिखाता है ? 💫🌟🎭 🔱 संवाद : नटराज का नृत्य और नये विचार शिष्य: गुरुदेव! नटराज के नृत्य में इतना आकर्षण क्यों है? यह केवल देवता की मूर्ति है या इसके पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा है? गुरु: वत्स, नटराज कोई साधारण रूप नहीं। यह ब्रह्मांड के सत्य का चित्र है। इसमें सृष्टि, संहार, ज्ञान और मुक्ति — सब छिपे हैं। शिष्य: कैसे गुरुदेव? कृपया विस्तार से कहिए। गुरु: देखो, नटराज का डमरू बजता है तो उससे नाद निकलता है। यह नाद ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति है। जैसे नाद से शब्द और भाषा जन्म लेते हैं, वैसे ही ब्रह्मांड की हर गति कंपन से जन्मी है। यही हमें नया विचार देता है कि ध्वनि केवल संगीत नहीं, बल्कि चिकित्सा और शिक्षा का मूल आधार हो सकती है। शिष्य: अद्भुत! और उनके हाथ की अग्नि? गुरु: वह अग्नि बताती है कि विनाश भी आवश्यक है। जैसे खेत में पुराना तिनका जलाकर नया अंकुर जन्म लेता है, वैसे ही अग्नि परिवर्तन और शुद्धिकरण का प्रतीक है। यह हमें नया विचार देती है कि हर कठिनाई और हर टूटन में एक नई सृष्टि छिपी है। शिष्य: और गुरुदेव,...

रुद्राभिषेक सामग्री लिस्ट | पंडित प्रदीप मिश्रा | सावन शिवरात्रि पूजन लिस्ट

ॐ ननः शिवाय॥ रुद्राभिषेक सामग्री लिस्ट 1. गेहूं के दाने - 21 2. कमल गट्टा - 5 3. चावल (अक्षत) – 108 4. काली मिर्ची-21 5. काली तिल - एक चुटकी 6. धतूरा-1 7. बेल पत्र-7 8. शमी पत्र-7 9. लाल गुलाब -> (7 गुलाब नहीं मिले तो एक ही गुलाब की पंखुड़ियां को तोड़ कर भी काम चला सकते हैं) 10. एक लोटा जल 11. पंचामृत स्नान के लिए  दूध, दही, शक्कर, शहद, रोली, मोली, कपूर, पीला चंदन, चावल, इत्र, लौंग, इलायची, गंगाजल, अबीर, गुलाल । 12. 2 घी के दीये (एक आरती के लिए और एक अखंड जलाने के लिए) 13. गोल सुपारी - 3 (एक संकल्प छोडने के लिए और दो गौरी गणेश बनाने के लिए) 14 जनेऊ-2 15. 5 प्रकार के फल इसके अतिरिक्त आप अपनी सुविधा के अनुसार मिठाई, या कुछ भी भोग शामिल कर सकते हैं। शाम को 9 से 10 बजे का इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आम्था चैनल और पर किया जाएगा।