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महाकाल' की नगरी 'उज्जैन

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महाकाल' की नगरी 'उज्जैन कहते हैं उज्जैन वहीं जाता है, जिसे महाकाल स्वयं बुलाते हैं। उनके आदेश के बिना उज्जैन जाना संभव नहीं। गत दिनों उज्जैन जाने और महाकालेश्वर के दर्शन का अति सौभाग्य प्राप्त हुआ। उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 15 मिनट की दूरी पर स्थित महाकाल के प्रांगण में पहुंचते ही प्रतीत होता है, जैसे किसी दिव्यलोक में पहुंच गए हों। मंदिर प्रांगण में प्रवेश करने के लिए कई द्वार हैं, इनमें सबसे भव्य और नवनिर्मित त्रिवेणी द्वार है, जहां महाकाल कॉरिडोर भी बनाया गया है। प्रवेश करते ही भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा के दर्शन होते हैं, जिस उपरान्त भगवान शिव के विभिन्न रूपों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर में प्रवेश करने लिए गेट नम्बर 1' अवंतिका द्वार' सबसे पुराना है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का मुख दक्षिण की ओर है, जिसको यमराज की दिशा भी कहा जाता है। मान्यता है कि महाकाल के दर्शन करने के उपरान्त जीवन एक बार पुनः शून्य से शुरू होता है। पिछले सब पाप महाकाल हर लेते हैं और भक्तों को नए सिरे से जीवन प्रारम्भकरने की प्रेरणा देते हैं। महाकाले...

शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि

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शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि है।  शिवलिंगी गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है,,। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। यह शरीर के धातुओं को पुष्ट करती है। यह सभी कुष्ठ रोग को ठीक करने वाली होती है। शिवलिंगी हल्की वीरेचक यानी मल निकालने वाली और शरीर को ताकत देने वाली होती है। शिवलिंगी के बीज लिवर,सांस की बीमारी, पाचन तंत्र आदि के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। शिवलिंगी बीज के औषधीय गुण,,,,, गर्भधारण विकार में शिवलिंगी का बीज उपयोगी होता है:  प्रजनन का सीधा संबंध अंडाणुओं और शुक्राणुओं की संख्या और स्वस्थ से है । शिवलिंगी के बीज ओवेरियन रिजर्व जैसी समस्याओं को दूर करते हैं और मासिक धर्म को नियमित करते हैं। इसके बीज चूर्ण का प्रयोग गर्भधारण हेतु किया जाता है।  कई महात्मा लोग स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चार दिन बाद एक माह तक सुबह शाम शिवलिंगी बीज एक एक ग्राम की मात्रा में खाली पेट दूध के साथ सेवन कराते हैं। जिनको पुत्र प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़े ...

शिव उपासना

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🌹// श्री शिव उपासना //🌹       ************************* // श्रीशिव-पञ्चनामानि // ********************* ॐ सद्योजाताय नमः । ॐ वामदेवाय नमः । ॐ अघोराय नमः । ॐ तत्पुरुषाय नमः । ॐ ईशानाय नमः II ५ II II इति शिवपञ्चनामानि II 🌹// श्रीशिवाष्टनामानि //🌹 *************************** शिवो महेश्वरश्चैव रुद्रो विष्णुः पितामहः । संसारवैद्यः सर्वज्ञः परमात्मेति चाष्टकम् ॥ शिवाय नमः । महेश्वराय । रुद्राय ।  विष्णवे ।पितामहाय । संसारवैद्याय ।  सर्वज्ञाय । परमात्मने नमः । II इति शिवाष्टनामानि समाप्ता II 🌹// श्रीशिव द्वादशनामस्तोत्रम् //🌹 ******************************** प्रथमस्तु महादेवो द्वितीयस्तु महेश्वरः तृतीयः शङ्करो ज्ञेयश्चतुर्थो वृषभध्वजः॥१॥ पञ्चमः कृत्तिवासाश्च षष्ठः कामाङ्गनाशनः। सप्तमो देवदेवेशः श्रीकण्ठश्चाष्टमः स्मृतः॥२॥ ईश्वरो नवमो ज्ञेयो दशमः पार्व्वतीपतिः। रुद्र एकादशश्चैव द्बादशः शिव उच्यते॥३॥ द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः। कृतघ्नश्चैव गोघ्नश्च ब्रह्महा गुरुतल्पगः॥४॥ स्त्रीबालघातकश्चैव सुरापो वृषलीपतिः। मुच्यते सर्व्वपापेभ्यो रुद्रलोक...

नटराज का पूरा तांडव नृत्य जीवन और ब्रह्मांड की गति के संदर्भ में हमें क्या सिखाता है ?

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नटराज का पूरा तांडव नृत्य जीवन और ब्रह्मांड की गति के संदर्भ में हमें क्या सिखाता है ? 💫🌟🎭 🔱 संवाद : नटराज का नृत्य और नये विचार शिष्य: गुरुदेव! नटराज के नृत्य में इतना आकर्षण क्यों है? यह केवल देवता की मूर्ति है या इसके पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा है? गुरु: वत्स, नटराज कोई साधारण रूप नहीं। यह ब्रह्मांड के सत्य का चित्र है। इसमें सृष्टि, संहार, ज्ञान और मुक्ति — सब छिपे हैं। शिष्य: कैसे गुरुदेव? कृपया विस्तार से कहिए। गुरु: देखो, नटराज का डमरू बजता है तो उससे नाद निकलता है। यह नाद ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति है। जैसे नाद से शब्द और भाषा जन्म लेते हैं, वैसे ही ब्रह्मांड की हर गति कंपन से जन्मी है। यही हमें नया विचार देता है कि ध्वनि केवल संगीत नहीं, बल्कि चिकित्सा और शिक्षा का मूल आधार हो सकती है। शिष्य: अद्भुत! और उनके हाथ की अग्नि? गुरु: वह अग्नि बताती है कि विनाश भी आवश्यक है। जैसे खेत में पुराना तिनका जलाकर नया अंकुर जन्म लेता है, वैसे ही अग्नि परिवर्तन और शुद्धिकरण का प्रतीक है। यह हमें नया विचार देती है कि हर कठिनाई और हर टूटन में एक नई सृष्टि छिपी है। शिष्य: और गुरुदेव,...

रुद्राभिषेक सामग्री लिस्ट | पंडित प्रदीप मिश्रा | सावन शिवरात्रि पूजन लिस्ट

ॐ ननः शिवाय॥ रुद्राभिषेक सामग्री लिस्ट 1. गेहूं के दाने - 21 2. कमल गट्टा - 5 3. चावल (अक्षत) – 108 4. काली मिर्ची-21 5. काली तिल - एक चुटकी 6. धतूरा-1 7. बेल पत्र-7 8. शमी पत्र-7 9. लाल गुलाब -> (7 गुलाब नहीं मिले तो एक ही गुलाब की पंखुड़ियां को तोड़ कर भी काम चला सकते हैं) 10. एक लोटा जल 11. पंचामृत स्नान के लिए  दूध, दही, शक्कर, शहद, रोली, मोली, कपूर, पीला चंदन, चावल, इत्र, लौंग, इलायची, गंगाजल, अबीर, गुलाल । 12. 2 घी के दीये (एक आरती के लिए और एक अखंड जलाने के लिए) 13. गोल सुपारी - 3 (एक संकल्प छोडने के लिए और दो गौरी गणेश बनाने के लिए) 14 जनेऊ-2 15. 5 प्रकार के फल इसके अतिरिक्त आप अपनी सुविधा के अनुसार मिठाई, या कुछ भी भोग शामिल कर सकते हैं। शाम को 9 से 10 बजे का इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आम्था चैनल और पर किया जाएगा।

सावन सोमवार व्रत की सरल पूजा विधि जाने

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सावन सोमवार व्रत की सरल पूजा विधि जाने 💐💐💐💐  आप इसे घर पर पूरी श्रद्धा से कर सकते हैं। आपको सरल पूजा विधि और पूजा की सामग्री दोनों विस्तार से बता रहा हूं, पूजा का समय:💥 प्रातः स्नान के बाद सूर्योदय से पूर्व या सुबह 6-9 बजे के बीच शुभ होता है। गोधूलि पर भी पूजा की जाती है पूजा का मुहूर्त जरूर देख लीजिएगा 🌿 पूजा की सामग्री: 1. शिवलिंग या शिवजी की मूर्ति/फोटो, गणेश भगवान की फोटो 2. गंगाजल मिला पानी 3. कच्चा दूध 4. दही 5. घी 6. शहद 7. शक्कर या गुड़ 8. बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला) 9. धतूरा (हो सके तो) 10. भस्म या सफेद चंदन 11. सफेद फूल (कनेर, कमल, आदि) 12. भोग (फल, मिठाई, खासकर साबूदाने की खीर या फलाहार) 13. दीया, कपूर, अगरबत्ती 14. रुद्राक्ष की माला (यदि हो) 15. पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर मिलाकर) 🙏 पूजा विधि  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर पूजा स्थान पर बैठकर गणेश भगवान से प्राथना करें कि आपकी पूजा सफल हो कोई विघ्न न आए 2. घर के मंदिर या साफ स्थान पर चौकी रखें उस पर सफेद फूलों का आसान बना कर शिवलिंग/शिवजी की फोटो रखें।, गणेश भगवान के साथ पूरे शिव प...

शिप्रा नदी की कहानी (Documentary) ।

शिप्रा नदी की कहानी (Documentary) ।  Shipra River Story ‪ Transcript: (00:00)  अजब सुरीली सी सर्वं कानों में रुन्जुन रुन्जुन  दूर पहाड़ों से घिरकर एक नदी जमी पर आती  अपना मलहार बजाती है लाखों त्योहार मनाती है  नदिया  नदिया  नदिया  नदियाँ नदी आँ  नदी जो अपने किनारे पर दरख़्त ही नहीं उगाती, वह उगाती है संस्कृति और सभ्यता । वे जहां जहां से भी बहती है वो पैदा करती है रीती रिवाज, गीत संगीत क्योंकि नदिया सिर्फ बहती नहीं हैं नदिया दुलारती हैं। अपनी धुन में मस्त हो बढ़ती जाती है। बढ़ती जाती है अपनी मंजिल को लक्ष्य बनाकर। (01:16)  बैकुंठ में इसे शिप्रा कहते हैं स्वर्ग में ज्वरहरनी यमद्वार में पापहरनी और पाताल में अमरिता संभव यह है शिद्वार में ज्वरहर्णि, यमद्वार में पापहर्णि और पाताल में अमृत सम्भव यह है शिप्रा।  आज हम भारत की सबसे पावन नदियों में से एक शिप्रा के साथ है।  इस समस्त पृथ्वी में शिप्रा के समान पुन्यदाईनी अन्य नदी नहीं  शिपरा की पुन्यदाईनी छवी आखर कैसे मनी  इसका जवाब तो नहीं है  बस इसके गीतों क�्रहाराय तिलोचना ...