शमी पत्र व मंदार की मार्मिक कथा
शमी पत्र व मंदार की मार्मिक कथा कथा इस प्रकार है :- एक बार नारद मुनि तीनों लोकों में विचरते हुए स्वर्गलोक में देवराज इंद्र के पास पहुँचे। इंद्र ने उनका यथोचित स्वागत किया। वार्तालाप के क्रम में इंद्र ने मुनि से कहा हे मुनिवर आप पृथ्वी लोग का भ्रमण करके आ रहे हैं तो कृपया मुझे औरव ऋषि और उनकी पुत्री की कथा सुनाने की कृपा कीजिए। नारदमुनि ने सहर्ष इस प्रकार कथा सुनाई, वे बोले, "इंद्र देव ! आपने एक ऐसी कथा सुनाने का आग्रह किया है जो मृत्यु लोक में लोगों के कष्टों को दूर करने वाली है । चलिए अब मैं महान ऋषि औरब तथा उनकी पुत्री शमी की कहानी आपको सुनाने जा रहा हूं। "एक समय में मालवा में औरव नाम के ऐसे विद्वान ब्राह्मण हुए जिनका तेज वेदों के ज्ञान रूपी सूर्य के सामान प्रदीप्त था। उन्हें देवताओं के सामान ही शक्तियां प्राप्त थी। बहुत दिनों बाद उनकी पत्नी ने एक अत्यंत सुन्दर पुत्री को जन्म दिया जिसका नाम शमी रखा गया। ऋषि शमी को बहुत ही स्नेह दिया करते थे। शमी जब बड़ी होने लगी तो उसने एक नियम बना लिया कि जो भी व्यक्ति उनके घर आता वह उसे भूखा नहीं जाने देती । वह भूखी रह जाती पर किसी को भू...