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501. || प्रथम कहानी || शिव और पार्वती का संवाद और पार्वती के जन्म की कथा

501. ||  प्रथम कहानी || शिव और पार्वती का संवाद और पार्वती के जन्म की कथा प्रथम कहानी शिव और पार्वती का संवाद किन्नर, गन्धर्व और विद्याधरों की निवासभूमि तथा समस्त पर्वतों का सम्प्राद् हिमालय पर्वत जगत प्रसिद्ध है ।।१३।। पर्वतों में इस हिमालय का माहात्म्य इतना बढा-चढ़ा है कि साक्षात् त्रि-जगत-जननी पार्वती, उसकी पुत्री बनीं ॥ १४ ॥ इस हिमालय का उत्तर शिखर कैलाश नाम से प्रसिद्ध है, जो सहस्रों योजन के भू-भाग को आक्रान्त करके फैला हुआ है ।। १५ ।। यह कैलास शिखर, अपनी अमल-धवल कान्ति से मन्दराचल को देखता और हँसता है कि उसके द्वारा क्षीरसमुद्र का मन्थन होने पर भी वह मेरे समान सुधा-धवल अर्थात अमृत के समान श्वेत न हो सका और मैं बिना प्रयत्न से ही शुभ्र अर्थात पूर्णतया श्वेत हूँ ।। १६ ।। उस कैलास शिखर पर, स्थावर-जंगम सृष्टि के स्वामी, विद्याधरो और सिद्धों से सेवित, महेश्वर शिव, अपनी अर्धांगिनी पार्वती के साथ निवास करते हैं ।। १७ ।। जिस शिवजी के पीतवर्ण एव ऊँचे जटाजूट पर स्थित अभिनव चन्द्रमा उदयाचल के सन्ध्याकालीन पीतवर्ण की शोभा धारण करता है ॥१८॥ जिन शिवजी ने अन्धकासुर के हृदय में शूल भोंकते हु...