शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि
शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि है।
शिवलिंगी गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है,,। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। यह शरीर के धातुओं को पुष्ट करती है। यह सभी कुष्ठ रोग को ठीक करने वाली होती है। शिवलिंगी हल्की वीरेचक यानी मल निकालने वाली और शरीर को ताकत देने वाली होती है।
शिवलिंगी के बीज लिवर,सांस की बीमारी, पाचन तंत्र आदि के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
शिवलिंगी बीज के औषधीय गुण,,,,,
गर्भधारण विकार में शिवलिंगी का बीज उपयोगी होता है:
प्रजनन का सीधा संबंध अंडाणुओं और शुक्राणुओं की संख्या और स्वस्थ से है । शिवलिंगी के बीज ओवेरियन रिजर्व जैसी समस्याओं को दूर करते हैं और मासिक धर्म को नियमित करते हैं। इसके बीज चूर्ण का प्रयोग गर्भधारण हेतु किया जाता है।
कई महात्मा लोग स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चार दिन बाद एक माह तक सुबह शाम शिवलिंगी बीज एक एक ग्राम की मात्रा में खाली पेट दूध के साथ सेवन कराते हैं।
जिनको पुत्र प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़े वाले गाय के दूध के साथ सेवन करना उपयुक्त होता है,और जिन्हें पुत्री प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़ी वाली गाय के दूध के साथ सेवन करना उत्तम रहता है।
जिन महिलाओं को गर्भ नहीं ठहरता हो अर्थात बार-बार गर्भ गिर जाता हो उन लोगों को मासिक धर्म के बाद पहले दिन से एक शिवलिंगी बीज का शुरुआत करते हुए प्रत्येक दिन एक बी बढ़ते जाएं और इस तरह 21 दिन करने से बांझ औरत मां बन जाती है और अगर बार-बार गर्भपात होता हो तो वह भी ठीक होकर गर्भ ठहर जाता है।
शिवलिंगी बीज आधा ग्राम और पुत्र जीवक एक ग्राम की मात्रा में लेकर के पाउडर बनाकर इसी के बराबर धागे वाली मिश्री मिक्स करके सुबह और शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से संतान की प्राप्ति होती है और बांझपन दूर हो जाता है।
बुखार में फायदेमंद,,,,,,
डिलीवरी के बाद जिन महिलाओं को बुखार आ जाता हो उसमें यह बहुत ही कारगर होता है शिवलिंगी के पंचांग के चूर्ण का 2 से 4 ग्राम की मात्रा में काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से बुखार उतर जाता है।
शिवलिंगी के बीजों का काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय में आई हुई सुजन तथा गर्भाशय का दर्द भी खत्म हो जाता है।
ल्यूकोरिया में फायदेमंद: -
शिवलिंगी बीज 50 ग्राम
रसवंती 50 ग्राम
मोचरस 50 ग्राम
नागकेसर 50 ग्राम
धागे वाली मिश्री 100 ग्राम
सबको लेकर के कूट पीसकर पाउडर बना कर रख ले। सुबह शाम 5/5 ग्राम के करीब खाना खाने के पश्चात सेवन करने से ल्यूकोरिया अर्थात सफेद पानी का आना बंद हो जाता है।
कुष्ठ रोग में फायदेमंद: -
शिवलिंगी बीज के रस में लाल चंदन घिसकर प्रभावित स्थान पर लेप करने से कुष्ठ रोग नष्ट होने लगता है।
शिवलिंगी बीज शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाता है: ......
जिन पुरुषों को वीर्य में शुक्राणु की कमी हो जाती है वह लोग संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। उन लोगों के लिए शिवलिंगी का बीज बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए लेना होगा
शिवलिंगी बीज 300 ग्राम
शतावरी 200 ग्राम
सफेद मूसली 200 ग्राम
शुद्ध कौंच बीज 200 ग्राम
अश्वगंधा 200 ग्राम
बिनोली गिरी 200 ग्राम
सभी को कूट पीसकर पाउडर बनाकर रख लें 5/5 ग्राम सुबह शाम दूध में मिश्री मिलाकर सेवन करने से शुक्राणुओं के संख्या में वृद्धि होने लगती है और यौन रोग से संबंधित सारी समस्याएं दूर हो जाती है।
गर्भ धारण करने के ५२ दिन से पहले ही सुबह सुबह सूर्योदय से पहले पूर्व की ओर मुंह करके बछड़े ्वाली गाय के कच्चे दूध से आधा चम्मच पिसी हुई शिवलिंगी ली जाय एक सप्ताह ऐसा करें तो पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी ,,,
शिवलिंगी क्या है?
शिवलिंगी एक बेल (लता) है जो बरसात के मौसम में पाई जाती है।
इसका पौधा बेल जैसा होता है, जिसमें पतली, धारीदार और रेशेदार शाखाएं होती हैं। पत्तियां करेले के पत्तों जैसी दिखती हैं, ऊपर से हरी और खुरदरी, नीचे से चिकनी। फल गोल, चिकने और आठ सफेद धारियों वाले होते हैं। कच्चे फल हरे होते हैं, पकने पर लाल हो जाते हैं। बीज भूरे रंग के और शिवलिंग के आकार के होते हैं।।
पौधे की विशेषताएं:
शिवलिंगी एक बेल की तरह होती है, जो दूसरी चीजों पर चढ़ती है.
तना:
तना चिकना और चमकदार होता है.
पत्तियां:
पत्तियां करेले के पत्तों की तरह दिखती हैं, ऊपर से खुरदरी और नीचे से चिकनी.
फूल:
फूल छोटे और हरे-पीले रंग के होते हैं.
फल:
फल गोल, चिकने और आठ सफेद धारियों वाले होते हैं। कच्चे फल हरे और पकने पर लाल होते हैं.
बीज:
बीज भूरे रंग के और शिवलिंग के आकार के होते हैं.।।
यह पौधा भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है, खासकर हिमालयी क्षेत्रों में।
पौधे का उपयोग:
औषधीय:
शिवलिंगी के बीज, फल, पत्तियां और जड़ें औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग की जाती हैं.
संतान प्राप्ति:
कुछ लोग इसका उपयोग संतान प्राप्ति के लिए करते हैं, खासकर शिवलिंगी के बीज।
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अन्य उपयोग:
इसका उपयोग बुखार, चर्म रोगों और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए भी किया जाता है।
ध्यान दें: किसी भी औषधि का उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना उचित है।
आप शिवलिंगी का पौधा निम्नलिखित स्थानों पर ढूंढ सकते हैं।
जंगलों में:
यह पौधा आमतौर पर जंगलों में पाया जाता है, खासकर हिमालयी क्षेत्रों में.
सड़क के किनारे:
बारिश के बाद, आप इसे सड़क के किनारे या खुले, झाड़ीदार क्षेत्रों में भी देख सकते हैं।
खेती वाले क्षेत्रों में:
कुछ स्थानों पर, इसकी खेती भी की जाती है.
देशी दवा दुकानों में या पंसारी के पास,,,
कुछ आयुर्वेदिक दवा दुकानों में भी शिवलिंगी के बीज या पाउडर उपलब्ध हो सकते हैं.
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