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Showing posts from November, 2025

महाकाल' की नगरी 'उज्जैन

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महाकाल' की नगरी 'उज्जैन कहते हैं उज्जैन वहीं जाता है, जिसे महाकाल स्वयं बुलाते हैं। उनके आदेश के बिना उज्जैन जाना संभव नहीं। गत दिनों उज्जैन जाने और महाकालेश्वर के दर्शन का अति सौभाग्य प्राप्त हुआ। उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 15 मिनट की दूरी पर स्थित महाकाल के प्रांगण में पहुंचते ही प्रतीत होता है, जैसे किसी दिव्यलोक में पहुंच गए हों। मंदिर प्रांगण में प्रवेश करने के लिए कई द्वार हैं, इनमें सबसे भव्य और नवनिर्मित त्रिवेणी द्वार है, जहां महाकाल कॉरिडोर भी बनाया गया है। प्रवेश करते ही भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा के दर्शन होते हैं, जिस उपरान्त भगवान शिव के विभिन्न रूपों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर में प्रवेश करने लिए गेट नम्बर 1' अवंतिका द्वार' सबसे पुराना है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का मुख दक्षिण की ओर है, जिसको यमराज की दिशा भी कहा जाता है। मान्यता है कि महाकाल के दर्शन करने के उपरान्त जीवन एक बार पुनः शून्य से शुरू होता है। पिछले सब पाप महाकाल हर लेते हैं और भक्तों को नए सिरे से जीवन प्रारम्भकरने की प्रेरणा देते हैं। महाकाले...

शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि

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शिवलिंगी एक प्रमुख औषधि है।  शिवलिंगी गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है,,। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। यह शरीर के धातुओं को पुष्ट करती है। यह सभी कुष्ठ रोग को ठीक करने वाली होती है। शिवलिंगी हल्की वीरेचक यानी मल निकालने वाली और शरीर को ताकत देने वाली होती है। शिवलिंगी के बीज लिवर,सांस की बीमारी, पाचन तंत्र आदि के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। शिवलिंगी बीज के औषधीय गुण,,,,, गर्भधारण विकार में शिवलिंगी का बीज उपयोगी होता है:  प्रजनन का सीधा संबंध अंडाणुओं और शुक्राणुओं की संख्या और स्वस्थ से है । शिवलिंगी के बीज ओवेरियन रिजर्व जैसी समस्याओं को दूर करते हैं और मासिक धर्म को नियमित करते हैं। इसके बीज चूर्ण का प्रयोग गर्भधारण हेतु किया जाता है।  कई महात्मा लोग स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चार दिन बाद एक माह तक सुबह शाम शिवलिंगी बीज एक एक ग्राम की मात्रा में खाली पेट दूध के साथ सेवन कराते हैं। जिनको पुत्र प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़े ...

शिव उपासना

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🌹// श्री शिव उपासना //🌹       ************************* // श्रीशिव-पञ्चनामानि // ********************* ॐ सद्योजाताय नमः । ॐ वामदेवाय नमः । ॐ अघोराय नमः । ॐ तत्पुरुषाय नमः । ॐ ईशानाय नमः II ५ II II इति शिवपञ्चनामानि II 🌹// श्रीशिवाष्टनामानि //🌹 *************************** शिवो महेश्वरश्चैव रुद्रो विष्णुः पितामहः । संसारवैद्यः सर्वज्ञः परमात्मेति चाष्टकम् ॥ शिवाय नमः । महेश्वराय । रुद्राय ।  विष्णवे ।पितामहाय । संसारवैद्याय ।  सर्वज्ञाय । परमात्मने नमः । II इति शिवाष्टनामानि समाप्ता II 🌹// श्रीशिव द्वादशनामस्तोत्रम् //🌹 ******************************** प्रथमस्तु महादेवो द्वितीयस्तु महेश्वरः तृतीयः शङ्करो ज्ञेयश्चतुर्थो वृषभध्वजः॥१॥ पञ्चमः कृत्तिवासाश्च षष्ठः कामाङ्गनाशनः। सप्तमो देवदेवेशः श्रीकण्ठश्चाष्टमः स्मृतः॥२॥ ईश्वरो नवमो ज्ञेयो दशमः पार्व्वतीपतिः। रुद्र एकादशश्चैव द्बादशः शिव उच्यते॥३॥ द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः। कृतघ्नश्चैव गोघ्नश्च ब्रह्महा गुरुतल्पगः॥४॥ स्त्रीबालघातकश्चैव सुरापो वृषलीपतिः। मुच्यते सर्व्वपापेभ्यो रुद्रलोक...