रुद्राक्ष और बेलपत्र का प्रयोग

श्री शिवायः नमस्तुभ्यम ।

रुद्राक्ष का उपयोग

* रुद्राक्ष को जल से भरे तांबे के लोटे में डालकर रखे । सुबह तांबे के लोटे का जल, भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ाये तथा जलहरी से गिरते हुए जल को दूसरे बर्तन में लेकर घर आऐ तथा बीमार या रोगी व्यक्ति को पिलाएँ। जल चढाते हुए बाबा कुंदकेश्वर से बीमारी दूर करने की कामना करते हुए जल चढाए। और इस जल को औषधि बनाने को प्रार्थना करें।

* जल चढ़ाते वक्त ध्यान दें कि इसमें दूध नहीं मिला होना चाहिए । यदि कोई दूसरा दूध चढा रहा है तो शिव लिंग को पुन: धोकर दूसरे बर्तन में यह जल लेना चाहिए। यदि वह व्यक्ति मान जाए तो वह आपकी प्रार्थना करने पर आपके जल चढ़ने के समय कुछ देर के लिए रुक भी सकता है।
बेलपत्र
* यदि संभव हो तो भोले बाबा पर एक कोमल सा बेलपत्र चढाएं तथा उसे बाबा कुंदेकेश्वर (Kund Keswar) से प्रार्थना कर कि बाबा इसे ओषधि बना दो। कह कर और मांग कर ले ले । फिर इसे अशोक सुन्दरी व नन्दी को छुआ कर बीमार या रोगी व्यक्ति को खाने को दे।


यदि बीमार / रोगी व्यक्ति मंदिर नहीं जा सकता तो घर का कोई भी व्यक्ति यह काम कर सकता है। अर्थात जल व बेलपत्र ला सकता है, ओर रोगी को दे सकता है। कभी-कभी दांडी काफी कठोर हो सकती है इसीलिए हमने इसे अच्छी प्रकार चबाकर खाने के लिए कहा है। 

डॉक्टर की दवाई कैसे खाएं 
* डॉक्टर की दवाई खाते वक्त मन में भावना रखे तथा जो दवाई खा रहे बाबा कुदकेश्वर से उस दवाई को औषधि बनाने को प्रार्थना करके ही दवाई खाएं।

श्री शिवाय नमस्तु‌भ्यम।

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