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महाशिवरात्री पूजन सामग्री लिस्ट‌ 2023

महाशिवरात्री पूजन सामग्री लिस्ट गणेश पूजा के लिए  दूब घास,  फल,  लड्डू व  जनेऊ माता की पूजा के लिए  मेहंदी पीला सिंदूर भस्म माता चुनरी व श्रृंगार लड्डू फल महाशिवरात्री पूजन हरी ईलायची। 11 लोंग 5 से 7 कालीमिर्च 21 दाने +3/4 अलग से  बेलपत्र 51 +4 से 5 शमीपत्र (ना मिले तो अक्षत या चावल) कटोरी में कुछ चावल 31 चावल के दाने अलग कमलगट्टे +5 से 7 गाय का शुद्ध घी दो दीपक शुद्ध घी के शक्कर /चीनी फल में बेर ( केला / फाल) मिठाई सफेद  शिवलिंग के लिए मिट्टी फूल आंकड़े का फूल (केतकी का नहीं) 2 जनेऊ धूप बत्ती 2/3 बनाकर रखें  थाली चन्दन या गुलाबी अबीर गुलाल (लाल नहीं) दो लोटे जल से भरे हुए। एक लोटा अलग से विभिन्न पूजा क्रियाओं के लिए गुलाब जल,  इत्र 

02. विद्येश्वरसंहिता || 09 || महेश्वरका ब्रह्मा और विष्णुको अपने निष्कल और सकल स्वरूपका परिचय देते हुए लिङ्गपूजनका महत्त्व बताना

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02. विद्येश्वरसंहिता  || 09 || महेश्वरका ब्रह्मा और विष्णुको अपने निष्कल और सकल स्वरूपका परिचय देते हुए लिङ्गपूजनका महत्त्व बताना नन्दिकेश्वर कहते है- तदनन्तर वे दोनों ब्रह्मा और विष्णु भगवान् शंकरको प्रणाम करके दोनो हाथ जोड़ उनके दायें-बायें भागमें चुपचाप खड़े हो गये। फिर, उन्होंने वहाँ साक्षात् प्रकट पूजनीय महादेवजीको श्रेष्ठ आसनपर स्थापित करके पवित्र पुरुष-वस्तुओंद्वारा उनका पूजन किया। दीर्घकालतक अविकृतभावसे सुस्थिर रहनेवाली वस्तुओंको ' पुरुष-वस्तु ' कहते हैं और अल्पकालतक ही टिकनेवाली क्षणभङ्गुर वस्तुएँ ' प्राकृत वस्तु' कहलाती हैं। इस तरह वस्तुके ये दो भेद जानने चाहिये। (किन पुरुष वस्तुओंसे उन्होंने भगवान् शिवका पूजन किया, यह बताया जाता है) हार, नूपुर, केयूर, किरीट, मणिमय कुण्डल, यज्ञोपवीत, उत्तरीय वस्त्र, पुष्प माला, रेशमी वस्त्र, हार, मुद्रिका, पुष्प, ताम्बूल, कपूर, चन्दन एवं अगुरुका अनुलेप, धूप, दीप, श्वेतछत्र, व्यजन, ध्वजा, चैवर तथा अन्यान्य दिव्य उपहारोंद्वारा, जिनका वैभव वाणी और मनकी पहुँचसे परे था, जो केवल पशुपति ( परमात्मा ) के ही योग्य थे और जि...

दुर्गा मंदिर, वाराणसी

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दुर्गा मंदिर, वाराणसी दुर्गा मंदिर दुर्गा कुंड से सटे संकट मोचन रोड पर, तुलसी मानस मंदिर से 250 मीटर उत्तर में, संकट मोचन मंदिर से 700 मीटर उत्तर-पूर्व में और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 1.3 किलोमीटर उत्तर में स्थित है । यह मंदिर वाराणसी कैंट स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर है। इस जानकारी से आप जहां भी हैं इस मंदिर के आसानी से दर्शन पा सकते हैं। बनारस में दुर्गा मंदिर स्थापित है दुर्गाकुंड के पास होने के कारण इस मंदिर को दुर्गा कुंड मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। तथा संपूर्ण क्षेत्र ही दुर्गाकुंड के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर पवित्र शहर वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है । कहते हैं  कि प्राचीन काल में  काशी में केवल तीन मंदिर ही थे, जिसमें पहला काशी विश्वनाथ, दूसरा मां अन्नपूर्णा, और तीसरा दुर्गा मंदिर है।    जैसा कि नाम से ही विदित है कि यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गाकुंड मंदिर काशी के पुरातन मंदिरों मे से एक है। इस मंदिर का उल्लेख 'काशी खंड' में भी मिलता है।  हमें यह भी बताया गया कि जहां पर माता स्वयं प्रकट होती हैं उन्हें स्थानों ...