Posts

शिप्रा जी संपूर्ण कहानी

शिप्रा जी  सामाजिक महत्व शिप्रा (क्षिप्रा), मध्यप्रदेश में बहने वाली एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक नदी है। यह भारत की पवित्र नदियों में एक है। इसका उद्गम धार के उत्तर में और इंदौर जिले के पास स्थित विंध्य पर्वतमाला में मुंडला गांव की काकरी-टेकड़ी नामक पहाड़ी से होता है खान, गम्भीर, गांगी, लूनी और ऐन नदियां इसकी सहायक नदियां है| जैसा कि हम जानते हैं कि यह नदी इंदौर जिले के  मुंडला गांव  की  काकरी-टेकड़ी  नामक पहाड़ी से निकल कर देवास जिले में प्रवेश करती है उसके उपरांत यह है उज्जैन जिले में प्रवेश करती है इसके ब्रांड मंदसौर जिले में प्रवेश कर लगभग 195KM बहने के बाद मंदसौर जिले में ही चंबल नदी मे मिल जाती है। इस प्रकार यह मध्य प्रदेश के चार जिलों से बहती हुई मालवा पठार से होकर प्रवाहित होने वाली चंबल नदी की सहायक नदी है।  सूखने लगा है शिप्रा का जल यदि शिप्रा के जल प्रवाह की बात की जाए तो इसका उद्गम स्रोत सूखने लगा है। जिससे इसके जल प्रवाह में कमी आ गई है। यह गर्मियों में सूखकर नाले में बदल जाती है। प्रदेश सरकार ने शिप्रा नदी के उद्गम स्थान के सूखने के कारण इसे जीव...

स्वप्नेश्वर महादेव की कथा प्रारम्भ (स्थान: महाकाल मंदिर प्रांगण में)

80/84 स्वप्नेश्वर महादेव की कथा प्रारम्भ (स्थान: महाकाल मंदिर प्रांगण में) (1) ईश्वरजी ने कहा-हे देवि ! अस्सी संख्या के स्वप्नेश्वर महादेव है ! जिनके दर्शन मात्र से दुस्वप्न का फल सुख देने वाला होता है : (2) पहिले प्रसिद्ध कल्माषपाद नाम के राजा इक्ष्वाकु कुल में हुए थे ! वे सूर्य के समान तेजस्वी थे (3) उन्होंने एक तमय वन्न में वशिष्ठमुनी के पुत्र को व उनकीं बहु को देखा ! वो मुनी धर्मज्ञ एवम जितेन्द्रिय थे तथा मार्ग में बैठे हुए तपश्चर्या कर. रह थे ! राजा ने मुनि से कहा मार्ग (रास्ते) से हट जाओं (4) परन्तु मुनि मार्ग से नहीं हटे, इसलिये राजा नेक्रोध में आकार अपने चाबुक से उन्हें पीटा (5) राक्षस की तरह कर्म करते देख वशिष्ठ मुनि के पुत्र ने राजा को शाप दे दिया और कहा (6) हे राजा तूं राक्षस हो जावेगा !! पुरूषों को खाने वाला होगा (7) तब राजा ने उसी समय मुनि को प्रणाम किया ! उपराध की क्षमा माँगी, परन्तु मुनि ने क्षमा नहीं किया ! मुनि की स्त्री से क्षमा मांगी ! उसने भी क्षमा नहीं किया (३) और अधिक कोध करने लगी ! तब तो राजा वशिष्ठ मुनि की स्त्री से क्षमा माँगी ! उसने भी क्षमा नहीं किया !! (9) औ...

शिवलिंग पर बने त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं का रहस्य ।।

Image
शिवलिंग पर बने त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं का रहस्य ।। प्राय: साधु सन्तों और विभिन्न पंथों के अनुयायियों के माथे पर अलग अलग तरह के तिलक दिखाई देते हैं। तिलक विभिन्न सम्प्रदाय, अखाड़ों और पंथों की पहचान होते हैं। हिन्दू धर्म में संतों के जितने मत, पंथ और सम्प्रदाय है उन सबके तिलक भी अलग अलग हैं। अपने अपने इष्ट के अनुसार लोग तरह तरह के तिलक लगाते हैं। शैव परम्परा का तिलक कहलाता है - "त्रिपुण्ड" भगवान शिव के मस्तक पर और शिवलिंग पर सफेद चंदन या भस्म से लगाई गई तीन आड़ी रेखाएं त्रिपुण्ड कहलाती हैं। ये भगवान शिव के श्रृंगार का हिस्सा हैं। शैव परम्परा में शैव संन्यासी ललाट पर चंदन या भस्म से तीन आड़ी रेखा त्रिपुण्ड् बनाते हैं। बीच की तीन अंगुलियों से भस्म लेकर भक्तिपूर्वक ललाट में त्रिपुण्ड लगाना चाहिए। ललाट से लेकर नेत्रपर्यन्त और मस्तक से लेकर भौंहों (भ्रकुटी) तक त्रिपुण्ड् लगाया जाता है। भस्म मध्याह्न से पहले जल मिला कर, मध्याह्न में चंदन मिलाकर और सायंकाल सूखी भस्म ही त्रिपुण्ड् रूप में लगानी चाहिए। त्रिपुण्ड की तीन आड़ी रेखाओं का रहस्य: त्रिपुण्ड् की तीनों रेखाओं में से...

भगवान शिव के अद्भुत अलौकिक चमत्कारी रहस्य

भगवान शिव के अद्भुत अलौकिक चमत्कारी रहस्य भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है। देवों के देव महादेव के जितने नाम हैं उतने ही उनके रूप भी हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के अलग-अलग रूप और उनकी महिमा के बारे में.... 1. आदिनाथ शिव : सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है। 2. शिव के अस्त्र-शस्त्र : शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था। 3. भगवान शिव का नाग: शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है। 4. शिव की अर्द्धांगिनी: शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं। 5. शिव के पुत्र : शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है। 6. शिव के शिष्य ...

रामायण 108 मनका

रामायण 108 मनका रघुपति राघव राजाराम । पतितपावन सीताराम ।।  जय रघुनन्दन जय घनश्याम । पतितपावन सीताराम ।। भीड़ पड़ी जब भक्त पुकारे । दूर करो प्रभु दुःख हमारे ।। दशरथ के घर जन्मे राम । पतितपावन सीताराम ।। 1 ।। विश्वामित्र मुनीश्वर आये । दशरथ भूप से वचन सुनाये ।।  संग में भेजे लक्ष्मण राम । पतितपावन सीताराम ।। 2 ।। वन में जाए ताड़का मारी । चरण छुआए अहिल्या तारी ।। ऋषियों के दुःख हरते राम । पतितपावन सीताराम ।। 3 ।। जनक पुरी रघुनन्दन आए । नगर निवासी दर्शन पाए ।।  सीता के मन भाए राम । पतितपावन सीताराम ।। 4।। रघुनन्दन ने धनुष चढ़ाया । सब राजो का मान घटाया ।।  सीता ने वर पाए राम । पतितपावन सीताराम ।।5।। परशुराम क्रोधित हो आये । दुष्ट भूप मन में हरषाये ।।  जनक राय ने किया प्रणाम। पतितपावन सीताराम ।।6।। बोले लखन सुनो मुनि ग्यानी। संत नहीं होते अभिमानी ।।  मीठी वाणी बोले राम । पतितपावन सीताराम ।।7।। लक्ष्मण वचन ध्यान मत दीजो। जो कुछ दण्ड दास को दीजो। धनुष तोडय्या हूँ मै राम । पतितपावन सीताराम ।।8।। लेकर के यह धनुष चढ़ाओ। अपनी शक्ति मुझे दिखलाओ।। छूवत चाप चढ़ाये राम । प...

नीति शतक (भरथरी द्वारा रचित)

Image
नीति शतक (भरथरी द्वारा रचित) नीति शतक मंगलाचरण दिक्कालाद्यनवच्छिन्नानन्तचिन्मात्लमूर्तये ।  स्वानुभूत्येकसाराय नमः शान्ताय तेजसे ।।१।। सभी दिशाओं और भूत भविष्यत्, वर्तमानादि कालों में अनवच्छिन्न, अनन्त, चैतन्यमात्र मूति बाले, अपने अनुभव से जानने योग्य, शान्त स्वरूप एवं तेजोमय परमात्मा को नमस्कार है ।१। यां चिन्तयामि सततं मयि सा विरक्ता साप्यन्यमिच्छति जनं स जनोऽन्यसक्तः । अस्मत्कृते च परितुष्यति काचिदन्या धिक् तां च तं च मदनं च इमां च मां च ॥२॥ मैं सदा जिसका विन्तन करता रहता हूँ, वह मुझसे विरक्त होकर अन्य पुरुष की कामना करती है, और वह अन्य पुरुष किसी अन्य स्त्री की कामना करता है तथा वह अन्य स्त्री मुझसे प्रीति करती है। अतएव मेरी स्त्री को, उस अन्य पुरुष को. मुझे चाहने वाली उस अन्य स्त्री को, मुझे और उस कामदेव को भी धिक्कार है ॥२॥ अज्ञः सुखमाराध्यः सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञः । ज्ञानलवदूविदग्धं ब्रह्मापि तं नरं न रञ्जयति ।।३।। अज्ञानी पुरुष सरलता से प्रसन्न किया जा सकता है. ज्ञानी पुरुष का प्रसन्न करना उससे भो सुखसाध्य है। परन्तु जो न ज्ञानी है, न अज्ञानी, उसे ब्रह्मा भी सत...